संथाल परगना और केरल के बीच फुटबॉल का फाइनल मुकाबला कल कोटा स्टेडियम में
तीरंदाजी में पूर्वी उत्तर प्रदेश के बच्चों ने मारी बाजी
रायपुर 30 दिसंबर 2024/ राजधानी रायपुर में चल रही 24 वीं राष्ट्रीय वनवासी क्रीडा प्रतियोगिता के आज तीसरे दिन फुटबॉल के कुल 09 मैच खेले गए जिसमें दो सेमीफाइनल के मैच भी शामिल है। छत्तीसगढ़ के वन मंत्री एवं स्वागत समिति के अध्यक्ष श्री केदार कश्यप ने कोटा स्टेडियम और तीरंदाजी खेल परिसर में पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया उन्होंने सभी खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया और बेहतरीन खेल दिखाने के लिए सभी का हौसला बढ़ाया।
फुटबॉल के मैच और परिणाम
पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी के खेल मैदान में आयोजित फुटबॉल मैच में केरल का दबदबा रहा केरल ने आज के अपने तीनों मैच जीते और फाइनल में जगह बनाई। सेमी फाइनल में केरल का मुकाबला मिजोरम से हुआ जहां केरल ने मिजोरम को मात देकर फाइनल में स्थान बनाया। पहले केरल ने दक्षिण बंगाल के साथ हुए मैच को टाई ब्रेकर तक खींचा और उसके बाद टाई ब्रेकर में दक्षिण बंगाल को एक गोल से हराया।
एक दूसरे मैच में मध्य भारत और नागालैंड के बीच बेहद रोमांचक मैच हुआ जिसमें नागालैंड के विनाश ने एकमात्र गोलकर अपनी टीम को विजय दिलाई। जशपुर और मिजोरम के मैच में टोपजी राम ने दो गोल कर जशपुर को 2- 1 से हराया और सेमीफाइनल में अपनी जगह बनाई । केरल और नागालैंड के मैच में भारी गहमा गहमी रही।
केरल ने मैच को 2- 1 से जीत कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। कोटा स्टेडियम पर आज 5 मैच खेले गए । झारखंड और उत्तर बंगाल के मैच में झारखंड में एक गोल से जीत हासिल की उत्तर बंगाल की टीम कोई गल नहीं कर सकी। गोवा की टीम ने राजस्थान को 4-0 से शिकायत दी। वही झारखंड और महाकौशल के बीच हुए मैच में झारखंड ने तीन गोल किए महाकौशल केवल एक ही गोल कर पाया । झारखंड ने मैच जीत कर सेमीफाइनल में जगह बनाया।
गोवा और संथाल परगना का मैच काफी रोमांचक रहा मैच टाई ब्रेकर तक पहुंचा।
टाई ब्रेकर में संथाल परगना ने गोवा को 4 – 2 से शिकस्त दी और सेमीफाइनल में प्रवेश किया।
सेमी फाइनल के परिणाम
पहले सेमीफाइनल में केरल और मिजोरम के बीच हुए मैच में दोनों टीमें छाई रही दोनों टीमों के खिलाड़ी निर्धारित समय तक कोई गोल नहीं कर सके । टाई ब्रेकर में केरल के खिलाड़ियों ने अपना वर्चस्व बनाए रखा और चार गोल किए। मिजोरम की टीम केवल तीन गोली कर सकी इस प्रकार केरल ने 4 – 3 से मैच जीत कर फाइनल में जगह बनाई।
दूसरे सेमीफाइनल मैच में संथाल परगना और झारखंड के बीच हाई वोल्टेज मैच हुआ। मैच में कोई भी टीम निर्धारित समय में गोल नहीं कर सकी। सडन डेथ में झारखंड ने चार गोल किए लेकिन संथाल परगना ने बेहतर खेल दिखाया और पांच गोलकर फाइनल में प्रवेश किया।
फुटबॉल का फाइनल मैच
फुटबॉल प्रतियोगिता का फाइनल मैच मंगलवार को सुबह 9:00 बजे से कोटा स्टेडियम में केरल और संथाल परगना के बीच खेला जाएगा।
तीरंदाजी प्रतियोगिता के आज के परिणाम
राज्य तीरंदाजी अकादमी मैदान पर आज 24वीं राष्ट्रीय वनवासी क्रीडा प्रतियोगिता के तहत तीरंदाजी के जूनियर और बालक /बालिका के 40 एवं 30 मीटर के मैच खेले गए।
तीरंदाजी के बालिका जूनियर वर्ग में उड़ीसा के तीरंदाजों का दबदबा रहा। उड़ीसा के मंजू लता ने 563 अंक प्राप्त कर पहला स्थान प्राप्त किया ।छत्तीसगढ़ की रामशिला नेताम ने 493 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रही ।वहीं उड़ीसा की मीना त्रिया 460 अंक लेकर तीसरे स्थान पर रही।
जूनियर बालक वर्ग में पूर्वी उत्तर प्रदेश के तीरंदाजो ने कमाल दिखाया दूसरे और तीसरे स्थान पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के तीरंदाज रहे ।राजस्थान के हिमेश बरांडा ने 643 अंकों के साथ पहला स्थान प्राप्त किया पूर्वी उत्तर प्रदेश के आदित्य सिंह ने 637 अंकों के साथ दूसरा और हीरा सिंह ने 626 अंकों के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया।
कोरबा, 22 सितंबर: डॉक्टरों को अक्सर भगवान का अवतार माना जाता है, लेकिन जब वही भगवान व्यापार में लिप्त हो जाए, तो परिणाम चिंताजनक हो सकते हैं। कोरबा में डॉक्टर विशाल राजपूत ने कुछ ऐसा ही किया है। उनके श्री हरि क्लिनिक एवं डायग्नोस्टिक सेंटर में बिना किसी योग्य पैथोलोजिस्ट की देखरेख के मरीजों के ब्लड सैंपल की रिपोर्ट तैयार की जाती थी। विशाल और उसकी पत्नी की कारस्तानियों की दास्तान हम आपको पहले ही बता चुके है।
हाल ही में हुए खुलासे से पता चला है कि रिपोर्ट में जिस डॉक्टर मृत्युंजय शराफ का डिजिटल सिग्नेचर होता था, वे खुद कोरबा में पांच स्थानों पर कथित रूप सेवाएं दिया करते हैं, जबकि बिलासपुर संभाग में विशाल के सहयोग से करीब 20 स्थानों पर फर्जी सेवाएं प्रदान की जा रही थीं। इस खुलासे के बाद, डॉक्टर मृत्युंजय ने विशाल समेत एक और पैथोलैब से इस्तीफा दे दिया है, जबकि अब भी 3 स्थानों पर बिना डॉक्टर के आये सिग्नेचर का उपयोग किया गया है। लेकिन सवाल यह है कि उन जांच रिपोर्टों का क्या, जो मृत्युंजय के नाम से जारी हुई हैं? क्या वे सच हैं? क्या सीएमएचओ ने मशीनों के एक्यूरेसी की जांच कराई है।
अधिक गंभीरता से, सीएमएचओ डॉक्टर एस एन केशरी अब तक जांच क्यों नहीं कर रहे हैं? क्या यह सिर्फ कुछ रुपयों की वजह से हो रहा है?
विशाल द्वारा लिखी गई प्रिस्क्रिप्शन को देख कर पता चलता है कि उनके द्वारा दी जाने वाली दवाएं सामान्य चिकित्सा में नहीं लिखी जातीं। कोरबा का कोई डॉक्टर उसकी लिखी पर्ची के आधार पर आगे न उपचार करता है न ही उनके उपचार के तरीकों को प्रोत्साहित करता है। कहा जाता है कि इन दवाओं का तत्काल प्रभाव तो होता है, लेकिन दीर्घकालिक परिणाम बेहद खतरनाक हो सकते हैं।
डॉक्टर विशाल के क्लिनिक में मिलने वाले इंजेक्शन बाजार में 10% से भी कम दाम पर मिलते हैं। मतलब, जिस इंजेक्शन को विशाल 2500 या 3500 रुपये में लगाते हैं, वही खुली बाजार में 250 से 300 रुपये में उपलब्ध है।
अधिकतर मरीजों को एक-दो इंजेक्शन से राहत नहीं मिलती; यहां की औसत संख्या तो 5 से 12 इंजेक्शन तक पहुंच जाती है।
इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। क्या डॉक्टर विशाल की करतूतें आपके स्वास्थ्य को खतरे में डाल रही हैं? सावधान रहें!
क्योंकि सीएमएचओ डॉक्टर एसएन केशरी जिनको पूरे मामले में सीलबंद कार्रवाई कर एफआईआर दर्ज करानी चाहिए वो लगता है सिर्फ निजी स्वार्थ की पूर्ति कर रहे है।
पत्नी ने सीएमएचओ को दी भ्रामक जानकारी
विशाल की पत्नी ममता सिंह राजपूत सीएमएचओ कार्यालय को भ्रामक जानकारी देकर बच निकलना चाहती है। श्री हरि क्लिनिक एवं डायग्नोस्टिक सेंटर की संचालक डॉक्टर विशाल की पत्नी ममता सिंह राजपूत है। इन्होंने सीएमएचओ कार्यालय से केवल पैथोलैब/ डायग्नोस्टिक सेंटर का ही पंजीयन कराया है। क्लिनिक के लिए अलग से पंजीयन कार्रवाई नहीं की गई है, लेकिन नोटिस के जवाब में ममता राजपूत ने लिखित में दिया है कि विशाल उनके पति है जो उनके क्लिनिक में अपने कार्यालय समय के बाद बैठ प्रैक्टिस करते है। जबकि बिना पंजीयन क्लिनिक का संचालन करने वाली ममता राजपूत न केवल अवैध क्लिनिक चला रही है बल्कि यहां उसके क्लिनिक में बैठकर डॉक्टर विशाल अवैध तरीके से बिना जीएसटी जमा कराए अवैध दवा कारोबारी बने हुए है जबकि इसी बिल्डिंग में मकान मालिक ने अपनी वैध दवा दुकान खोल रखी है इनको यहां का स्थान भी इसी शर्त पर निःशुल्क दिया गया है कि वो यहां दवा नहीं बिक्री करेंगे लेकिन बावजूद जुबान को दरकिनार कर डॉक्टर विशाल सिर्फ व्यापार में लगे हुए है।
विशाल को नहीं है निजी क्लिनिक में पैरेक्टिस का अधिकार
डॉक्टर विशाल सिंह राजपूत रशिया से एमबीबीएस किये है, सरकारी मेडिकल ऑफिसर बनने के बाद सरकारी कोटे से उनके पीजी की पढ़ाई पूरी करा उनको एमडी बनवाया गया है। विशाल की सेवाएं संचालक स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत है उनको सिर्फ अपने घर ही प्रैक्टिस की अनुमति है लेकिन वो सुभाष चौक के पास स्थापित कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में गैर पंजीकृत क्लिनिक में बैठ अपनी दुकान चला रहे है इसके लिए बाकायदा बोर्ड भी निगम की सड़क को अतिक्रमित कर लगाया गया है।
अब डॉक्टर अरोरा के नाम का लिया जा रहा है सहारा
सीएमएचओ ने छोटे लालच में पड़ पहले श्रीमती ममता सिंह राजपूत को एक नोटिस दिया इसका जवाब भी उन्होंने ही अपने घर पर बैठ तैयार कराया। जो पैथोलोजिस्ट मृत्युंजय शर्मा खुद सीएमएचओ के पास कबूल कर चुके थे कि वो सेवाएं नहीं देते है पहले सिर्फ दोस्ती के नाते डिग्री दे दिए थे उनसे स्टाम्प में लिखवाया गया कि वो एक घंटे शाम में सेवाएं देते हैं जबकि कइयों दिन में जारी रिपोर्ट की कॉपी हमारे पास है। बाद में आहत डॉक्टर मृत्यंजय ने एक दिन बाद ही अपना इस्तीफा सीएमएचओ कार्यालय में जमा कर दिया, मतलब आप खुद समझ सकते है। अब श्रीमती ममता राजपूत ने एक आवेदन दिया है जिसमे 61 वर्षीय डॉक्टर अरोरा जो पैथोलॉजी में एमडी तो नहीं है लेकिन डिप्लोमाधारी है उनके कुछ घंटे सेवा देने की बात बताई गई है, लेकिन हम यक़ीन के साथ कह सकते है डॉक्टर अरोरा के डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग होगा। डॉक्टर अरोरा पहले से ही एक लैब में सेवा दे रहे है वहीं वो एक चैरिटेबल ट्रस्ट में निःशुल्क सेवा देने कुछ दिन में जाने वाले है ऐसे समझा जा सकता है कि वो श्री हरि क्लिनिक एवं डायग्नोस्टिक सेंटर कब आएंगे। डॉक्टर ने पहले अपने दोस्त के डिग्री और सिग्नेचर का उपयोग किया अब लग रहा है, अपने पिताजी के संबंधों का फायदा उठा डॉक्टर अरोरा के नाम का उपयोग होगा।
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छोड़े गए नवजात शिशुओं का रखते हैं ख्याल
कुदुदंड स्थित सेवा भारती मातृछाया की स्थापना वर्ष 2004 में की गई थी। संस्था का मूल उदेश्य माता-पिता द्वारा छोड़े गए शिशुओं का ख्याल रखना और लालन-पालन करना है। इसके साथ ही निराश्रित शिशुओं और निःसंतान दंपतियों के बीच की खाई को पाटना है।
छोटी सी कोशिश से बड़ा बदलाव
लता संस्था की सह सचिव लता गुप्ता ने कहा कि बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाना हमारी सबसे बड़ी जीत है। हर बच्चा एक नई उम्मीद है और सजल उन सभी में सबसे खास है।
यह पहल समाज में उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो अनाथ बच्चों के जीवन में प्रेम और सुरक्षा का नया अध्याय जोड़ना चाहते हैं। सेवा भारती जैसे संगठन यह साबित करते हैं कि छोटी सी कोशिश से बड़ा बदलाव संभव है।
कारा के माध्यम से लिया गोद
कारा (सेंट्रल एडाप्शन रिसोर्स अथारिटी) भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत काम करती है। यह एजेंसी देश और विदेश में बच्चों को गोद लेने की पूरी प्रक्रिया को संभालती है।
कारा को सेंट्रल अथारिटी का दर्जा प्राप्त है और अगर किसी विदेशी दंपती को भारत से बच्चा गोद लेना हो तो इसके लिए हेग कन्वेंशन के नियम लागू होते हैं। कारा इन नियमों का पालन सुनिश्चित करती है। अनाथ या सरेंडर किए गए बच्चों को मान्यता प्राप्त एजेंसियों के माध्यम से गोद लिया जाता है।
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इस प्रक्रिया में परीक्षा के दौरान लाइव वीडियो और फोटो के माध्यम से किसी अन्य की जगह परीक्षा देने वाले व्यक्ति को आसानी से पकड़ा जा सकेगा। परीक्षा केंद्रों में परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्रों के क्यूआर कोड की स्कैनिंग और बायोमीट्रिक डिवाइस से परीक्षार्थियों का ऑनलाइन वेरिफिकेशन भी अनिवार्य कर दिया गया है।
सीजीपीएससी की 2021 की परीक्षा में भाई-भतीजावाद के आरोप लगने के बाद पीएससी ने यह तरीका अपनाया है। इसका पहला प्रयोग परिवहन विभाग की उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा में एक सितंबर को 16 केंद्रों में किया जा चुका है, जो सफल रहा।
बता दें कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में पीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, सचिव जीवन किशोर ध्रुव समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ गड़बड़ी करने के आरोप में सीबीआई जांच चल रही है।
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राज्य में कोरबा जिला अपने जैवविविधता के लिए जाना जाता है जहा सांपो की कई प्रजातियां मिलती हैं और इस वजह से इसे छत्तीसगढ़ के नागलोक भी कहा जा सकता हैं।
खाद्य और गरम जगहों की तलाश इन जीवों को मानवीय रहवास तक लाती है जिससे सर्प दंश की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। जो की चिंता का विषय हैं, अंध विश्वास और जागरूकता की कमी के कारण कई बार इलाज ना मिलने पर मौत भी हो रही हैं, और भी कारण जैसे लोगों का जमीन पर सोना, मच्छर दानी का उपयोग न करना और झाड़ फूंक आदि के चक्कर में पड़ रहे।
छत्तीसगढ़ राज्य वन विभाग और नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी द्वारा राज्य के कोरबा जिले में किंग कोबरा पे कई सालों से काम किया जा रहा है इसी कड़ी में टीम का ध्यान सर्प दंश को कम करने का है। सर्प बचाव दल द्वारा लगातार सांपों के बचाव कार्य कर लोगों की जान बचाई जा रही हैं साथ ही चिकित्सा विभाग के साथ मिल कर दंश का जल्द से जल्द उपचार, लोगों को जागरूक करना, यदि दंश से मृत्यु हो जाती है उस स्तिथि में मुआवजे की प्रक्रिया में मदद करना जैसे विषयों में मदद प्रदान कार्तिवाई हैं। कोरबा के 200000 हेक्टेयर में रेस्क्यू करने अलग अलग गांव में रिस्पॉन्स टीम बना कर विस्तृत तरीके से काम किया जा रहा हैं।
किंग कोबरा प्रोजेक्ट क्या है – कोरबा की पहचान यहां पे पाए जाने वाले सर्प विविधता के कारण अक्सर सुर्खियों में रहता हैं पुरे मध्य भारत में केवल छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में विश्व का सबसे विशाल विषधर साप किंग कोबरा (पहाड़ चित्ती) का मिलना अपने आप में अनोखा हैं ऐसे दुर्लभ सांप के साथ अन्य सभी सरीसृपों और वन्यजीव के संरक्षण के लिए पिछले 5 सालों से किंग कोबरा प्रोजेक्ट कोरबा में किया जा रहा हैं। और इस मुहीम के माध्यम से आम जनमानस को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ा जा रहा हैं।
नोवा नेचर के अध्यक्ष एम सुरज और सचिव मोइज अहमद के मार्गदर्शन में टीम के जितेंद्र सारथी, मयंक बागची और सिद्धांत जैन ने कोहडिया क्षेत्र में सर्प दंश से मृत बच्ची के परिवार से मिले और संवेदना जाहिर किया साथ ही इस दुख के घड़ी में हर सम्भव मदद करने की बात कहीं, साथ ही घटना की पूरी जानकारी ली जिसमे बच्ची की मां ने बताया रात 2 बजे बच्ची बोली मां गले में दर्द हो रहा और पेट में दर्द हो रहा जिसके फौरन बाद उसको पास ही के चिकत्सालय में ले जाया गया जहां से सीधे जिला अस्पताल ले जानें को कहा गया, जहां जिला अस्पताल में उपचार के दौरान बच्ची की मौत हो गई, बच्ची के मां पूरी तरह टूट चुकी थी साथ ही इस घटना से पूरा परिवार शोक में डूबा हुआ था, वहीं हाल ही में पड़री पानी और बैगमार गांव में सर्प दंश से मृत पीड़ित परिवार से भी मुलाकात किया गया।
विश्व में भारत सबसे ज्यादा सर्प दंश के घटनाओं के लिए जाना जाता हैं और छत्तीसगढ़ जिसका 70% जनसंख्या आज भी कृषि आधारित हैं और 44% भू भाग वनों से आचादित में यह घटनाएं कम नहीं हैं। 2018 से 2023 के मध्य राज्य में 16000 से ज्यादा सर्प दंश की घटनाएं हुई हैं। ऐसे में इसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए और इस दिशा में सभी को मिल कर कार्य करने की जरूरत हैं।
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बिलासपुर, 8 अक्टूबर 2024 — शहर का सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजन, रास डांडिया, फाउंडेशन एकेडमी रिंग रोड पर पूरे उत्साह के साथ जारी है। इस भव्य आयोजन के पीछे प्रिंस भाटिया और उनकी टीम की महीनों की कड़ी मेहनत और समर्पण है। आयोजन की शुरुआत 5 दिन पहले हुई थी, और अब यह शानदार उत्सव 4 दिन और चलेगा, जिसमें शहर के लोग उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं।
प्रिंस भाटिया और उनका परिवार हर साल इस आयोजन को नई भव्यता और अनुशासन के साथ प्रस्तुत करता है, और इस बार भी उन्होंने अपने प्रयासों से इसे सफलता की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। आयोजन स्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, और सुरक्षा कर्मियों का विनम्र और कुशल व्यवहार लोगों के लिए एक मिसाल बन गया है। शासन की गाइडलाइंस का पूरी तरह से पालन करते हुए, यह आयोजन भव्य और सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ रहा है।
श्रद्धालु और उत्सव प्रेमी बड़ी संख्या में इस आयोजन में भाग ले रहे हैं, जिसमें श्रद्धा, विश्वास, और अनुशासन का अद्भुत मिश्रण देखने को मिल रहा है। फाउंडेशन एकेडमी के सौजन्य से आयोजित यह रास डांडिया बिलासपुर की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक बन चुका है। हर साल इसे और बेहतर बनाने का प्रयास किया जाता है, और इस बार भी प्रिंस भाटिया और उनकी टीम ने इस आयोजन को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
पहले 5 दिनों के दौरान, भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह ने आयोजन स्थल को जीवंत बना दिया है। सभी आयु वर्ग के लोग इस डांडिया उत्सव का हिस्सा बन रहे हैं और अपनी पारंपरिक वेशभूषा और जोश के साथ इसमें हिस्सा ले रहे हैं। आने वाले 4 दिनों तक यह उत्सव और भी बड़े पैमाने पर मनाया जाएगा, जिसमें शहर के प्रमुख लोगों के अलावा दूर-दूर से आए प्रतिभागी भी हिस्सा लेंगे।
यह रास डांडिया न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव है, बल्कि यह बिलासपुर की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को संजोने का प्रतीक है। प्रिंस भाटिया और उनकी टीम का यह निरंतर प्रयास उन्हें शहर के प्रमुख आयोजकों में स्थान दिलाता है। इस आयोजन को सफल बनाने में उन्होंने जो मेहनत की है, वह पूरे शहर के लिए गर्व की बात है।
आगामी चार दिनों में भी लोगों के लिए आकर्षक कार्यक्रम और आयोजन होंगे, जो इस रास डांडिया को और भी रोमांचक और यादगार बनाएंगे। माँ महामाया का आशीर्वाद इस आयोजन और इसे सफल बनाने वाली पूरी टीम पर बना रहे।
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